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कैसे कहें अलविदा ये नयन रो पड़ेंगे

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आज नभ में तारे भी कम चमकेंगे घटा घनघोर भी हटे न हटेंगे , साथ थे जो हमारे सालों से आज तक लग रहा है वो भी छोड़कर चल चलेंगे , दिया साथ आपने अजनबी इस शहर में, आज फिर से हमें अजनबी कर चलेंगे , यादों की घड़ियाँ लिए साथ अपने उन पेड़ो की छावं में फिर हम मिलेंगे, बिताई है हमने जो चंद घड़ियाँ सुहानी, हॉस्टल की छत और गार्डेन की कहानी, इस शहर की सड़के भी तन्हा रहेगी तन्हा रहेगी और हमसे कहेगी , "रोक लो इन सितारों को जाने को है, जिनकी मंजिल गगन को सजाने में है" आपको रोकें या हम खुद को संभालें लगता है यहाँ हम सभी रो पड़ेंगे, गगन रो पड़ेंगे चमन रो पड़ेंगे कैसे कहें अलविदा ये नयन रो पड़ेंगे ..!!!

चाहत

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जहाँ मिले थे वो एक दिन यूँ अचानक वहीँ फिर से मिलने को जी चाहता है, उनसे हो गयी है मुहब्बत खबर ये पहुँचाने को जी चाहता है , वो तो गुमसुम से खड़े रहते हैं हमें अपनी सुनाने को जी चाहता है , मैं तो ज़माने से डरता नहीं हूँ नज़रें मिलाने को जी चाहता है , मेरे दिल को जो तू न समझा ; खुद को मिटने को जी चाहता है !!

बस यूँ ही !!

ज़िन्दगी जब अपने हाथों से फिसलती महसूस होती है, पलकें खुली और आँखों में ख्वाहिश की चुभन महसूस होती है , तोड़ कर दे दो मुझे कोई मेरे ख्वाहिश के सितारों को , एविं ज़िन्दगी भी ज़बरदस्ती की महसूस होती है ..!!! यूँ तेरा शरमा के चले जाना कुछ तो बयां करती है , बेक़रारी ए दिल में नींद तुम्हें भी नहीं आती ; यूँ तो कसक इश्क की मेरे दिल में भी है , रह रह के टीस क्या तेरे दिल में नहीं आती ..??